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Friday, 10 October 2008

जहॉं मैं घंटे-भर बेहोश रहा....

मैं स्‍ट्रेचर पर लेटा हुआ था। गहरी नींद के बीच कुछ परि‍चि‍त-सी आवाज सुनाई पड़ रही थी। बोझि‍ल पलकों को उठाने की कोशि‍श की, इतना ही देख सका कि‍ कुछ रि‍श्‍तेदार आए हुए हैं। मैं कुछ पूछना चाह रहा था, पर जुबान धाराशायी-सी लग रही थी। मैंने लटपटायी आवाज में अपनी पत्‍नी से पूछा- इनलोगों को बुलाने के लि‍ए मैंने मना कि‍या था, ये क्‍यों आ गए? आना भी था तो आपरेशन के बाद आते!

पत्‍नी ने कुछ कहा पर वह मुझे साफ-साफ समझ नहीं आया। मैंने कहा कि‍ मुझे बाथरूम ले चलो। नर्स ने कहा कि‍ आपसे ‘यूरीन बैग’ जुड़ा हुआ है, आपको बाथरूम जाने की जरूरत नहीं है। मैं नींद में डूबा हुआ-सा था, मुझे झल्‍लाहट हुई कि‍ मैं बि‍स्‍तर पर लेटे हुए ऐसा कैसे करूँ!

कमरे में एक दीवार घड़ी थी, पर उसकी सुइयॉं मुझे नजर नहीं आ रही थी। मैं हैरान हुआ कि‍ मैं इतनी नींद में क्‍यूँ हूँ! समय पूछने पर मुझे बताया गया- साढ़े छह! मैंने रौशनदान की तरफ देखने की कोशि‍श की कि‍ यह सुबह है या शाम, पर समझ नहीं आया। मुझे बताया गया कि‍ शाम है। मैं हैरान हो गया कि‍ शाम सवा पॉच बजे मुझे ऑपरेशन थि‍येटर ले जाया गया था फि‍र यहॉं कब आया! बीच का एक घंटा कहॉं गायब हो गया। मैंने जोर देकर सोचा- तब डॉक्‍टर ने दो बड़े इंजेक्‍शन मुझे लगाए थे। मैंने उससे सि‍र्फ इतना ही पूछा था कि‍ ज्‍यादा तकलीफ तो नहीं होगी? जवाब सुनने से पहले ही एनेस्‍थेसि‍या का असर हो चुका था............ एक कसक-सी उठी, यानी ऑपरेशन हो चुका है! मुझे खुशी हुई कि‍ वह घड़ी नि‍कल चुकी है और यहॉं से मुझे बस रि‍कवर करना है। तब मुझे ध्‍यान आया कि‍ मैं स्‍ट्रेचर पर नहीं, वार्ड न.5 के बि‍स्‍तर पर लेटा हुआ हूँ।

रात होने तक सभी चले गए। एटेंडेंट के रूप में पत्‍नी का साथ मेरे लि‍ए दवा से कम न था। रात का खाना आ गया। ‘सब्‍जी’ तेल और मि‍र्च में डूबी हुई थी,उसके साथ रोटी खाते हुए सोचने लगा कि‍ डॉक्‍टर वैसे तो तमाम सलाह देगा कि‍ ये खाना है ये नहीं खाना, पर क्‍लीनि‍क में पेसेंट को खाने में क्‍या दि‍या जा रहा है, ये वो नहीं देखता!

पहली रात बेहोशी और नींद के दरम्‍यान मैं गोते लगाता रहा। कभी ऐसा लगता जैसे मैं बि‍स्‍तर पर नहीं, सागर की लहरों पर लेटा हुआ हूँ, एक बेड़े की तरह डगमगाता हुआ दि‍शाहीन भटका जा रहा हूँ। तो कभी ऐसा लगता जैसे कागज की तरह ऑंधी में उड़ा जा रहा हूँ, एक अजीब-सी बेचैनी थी, जि‍से शब्‍दों में बयान कर पाना आसान नहीं। बस इतना ही कह सकता हूँ कि‍ ये वो क्षण था जहॉं न जिंदगी के बारे में कुछ सोच सकता था न मौत के बारे में।
एक भटकती आत्‍मा-सी बेजान जि‍न्‍दगी लग रही थी।

रात को बाथरूम की लाइट ऑन रहती थी, उस भीनी रोशनी में नर्स आती और आकर एंटीबायटीक/ग्‍लूकोज़ की नई बोतल चढ़ा जाती। साथ ही कैनुला के जरि‍ए दो इंजेक्‍शन भी लगा जाती, मैं आग्रह करता कि‍ लाइट ऑन कर लीजि‍ए और धीरे-धीरे इंजेक्‍ट कीजि‍ए, नस में अचानक तेज प्रवाह आने से दर्द की चुभन बनी रहती है। कोई फर्क नहीं पड़ेगा- यह कह कर नर्स चली जाती। उसके जाने के बाद एकाध घंटे तक मुझे फर्क पड़ता रहता।


एक बार तो हद हो गई। उस क्‍लीनि‍क में यह मेरी दूसरी रात थी। नर्स आई और एंटीबॉयटीक की बोतल बदलने के बाद कैनुला के जरि‍ए इंजेक्‍शन लगाने लगी। तभी उसका मोबाइल बजा, उसने मोबाइल नि‍कालकर कान और कंधे के नीचे दबाया और हाय-हैल्लो करने लगी। इंजेक्‍शन आधा ही लगा था। मैं कहता रहा- आ..धीरे-धीरे!! वह गर्दन हि‍लाकर मुझे जवाब देती रही या फोनवाले को, पता ही नहीं चला। वह इंजेक्‍शन ठूँसकर चलती बनी। मुझे फि‍र एक घंटे तक फर्क पड़ता रहा।


खैर, यह तो अच्‍छी और जानी-मानी क्‍लीनि‍क थी, मामूली जगह इलाज कराता तो न जाने और भी कई कहानी बन गई होती; तब वह कहानी न रहती, हादसा बन जाता........।

(uretic stone नि‍कालने के लि‍ए endo incision की प्रक्रि‍या अपनाई जाती है, इस वि‍डि‍यो को आप यहॉ देख सकते हैं।)

(सभी चि‍त्रों के लि‍ए गूगल का आभार)

23 comments:

masijeevi said...

जितेंद्रजी,

ओह अभी पता चला, आशा है अब आप बेहतर है। हम किसी काम आ सकें तो नि:संकोच कहें।


टेक केयर।

अनूप शुक्ल said...

जल्द टनाटन चकाचक होने की मंगलकामनायें।

श्रीकांत पाराशर said...

Apna dhyan rakhiye bandhu.

ताऊ रामपुरिया said...

अब तसल्ली हुई ! आप जल्दी से रिकवर हो कर मैदान संभालो यार !
आप की कमी अखर रही थी ! हमारे लायक कोई सेवा हो तो आदेश करिएगा !
आपने हॉस्पिटल के अनुभव को अच्छे शब्दों में बांधा है ! एक दिन बहुत ऊँचे उडोगे बिरादर !
शुभकामनाएं !

PD said...

अरे साहब, ये कब हुआ? आपने बताया नहीं.. आपने तो बस इतना ही बताया था कि वायरल बुखार से परेशान हैं.. खैर जल्दी ठीक हो जाईये..

फ़न्डेबाज said...

aap jald swasth ho ! shubhakamanae .

फ़न्डेबाज said...

aap jald swasth ho ! shubhakamanae .

भूतनाथ said...

बहुत अच्छी तरह आपने अपने अस्पतालीय अनुभव हमसे शेयर किए ! आप जल्दी भले चंगे होकर काम पर आजावो ! आपको ईश्वर जल्द तंदुरुस्त करे यही प्रार्थना है ! आपका इंतजार है ! बहुत शुभकामनाएं !

राज भाटिय़ा said...

आप का हाल सुन कर मुझे अपने सारे वक्त याद आ गये मेरे ६,७ अप्रेशन हो चुके है, ओर अब तो डर भी नही लगता, ना हि दर्द होती है, चलिये जल्दी से ठीक हो जाओ, फ़िर बाते करेगे.
आप की सेहत जल्द ठीक हो भगवान से यही प्राथना करते है,
ढेर सी शुभकामनाये

Gyandutt Pandey said...

आप पूर्णत: स्वस्थ रहें यह कामना है।

रंजना [रंजू भाटिया] said...

आप जल्दी से स्वस्थ हो जाए ..शुभकामनाएं

seema gupta said...

"oh how painful it was na, but thanks god all goes well. take care and get well soon. wish you early healthy recovery'

regards

Anil Pusadkar said...

अब सब चिंता छोड फ़टाफ़ट ठीक हो जाइये और फ़िर से शुरु हो जाईये।जितने दिन अब्सेंट रहे उसका भी तो हिसाब पूरा करना पडेगा।ईश्वर आपको ज़ल्द स्वस्थ करे।

लवली said...

jaldi thik ho jayenge aap ..hum sab ki prarthana aur shubhkamnaye aapke sath hai..jldi hi yah dour bhi nikal jayega.main aapki sighra swasth hone ki kamana aur prathna karungi.

डॉ .अनुराग said...

चलिए आप ठीक होकर आए यही अच्छी बात है.......उसे क्लिनिक न कहिये नर्सिंग होम कहे ......क्लीनिक में तो ओ पी डी के मरीज या छोटी मोटी सर्जरी की जाती है

Udan Tashtari said...

Shighra swasthya laabh ki mangal kamanaayen.

योगेन्द्र मौदगिल said...

अरे बिरादर
धर्मस्थलों के बाद सबसे बड़े लूट के अड्डे से आप निकल आये
यह उपलब्धि है आपकी
जितना महंगा अस्पताल
उतने सस्ते वार्डब्वाय और नर्सें
बेतहज़ीब
लापरवाह
लेकिन ये बेचारे भी क्या करें
डाक्टर जितना कमाता है
उसके अनुसार तनख्वाह नहीं देता
खैर
फिर भी
शुभकामनाएं
और सिर्फ
शुभकामनाएं
आपको भी उनको भी

COMMON MAN said...

main to yahi kahoonga ki kisi ko bhi aspatal ka muh na dekhna pade, operation se bach gaye to bill se mar jaata hai aadmi, ishwar aapko dirghayu kare aur aage kabhi hospital na bheje

अशोक पाण्डेय said...

हमारी शुभकामनाएं हैं कि आप जल्‍द स्‍वस्‍थ हों।

pallavi trivedi said...

उसने मोबाइल नि‍कालकर कान और कंधे के नीचे दबाया और हाय-हैल्लो करने लगी। इंजेक्‍शन आधा ही लगा था।

ye to had hi ho gayi....khair aap jaldi poori tarah swasth ho jayen yahi kaamna hai!

yamaraaj said...

jitendr ji
shubh shub kahe kabhi kisi ke sath hadase n ho . badhiya post. dhanyawad.

yamaraaj said...

apke jaldi swasthy hone ki kamana ke sath
yamaraaj.

अभिषेक ओझा said...

भगवान् ऐसी जगह से बचाए !