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Thursday, 4 December 2008

पापा!

पि‍छले दस दि‍नों में मैंने जिंदगी का एक नया चेहरा देखा। काफी समय से सोच रहा था कि‍ मैं अपने पि‍ता के बारे में कुछ लि‍खूँ, मगर मालूम नहीं था कि‍ ये अवसर इस रूप में सामने आएगा।

मैं उन बदनसीब बेटों में से एक हूँ जि‍न्‍हें अपने पि‍ता के साथ रहने का अवसर कम-से-कम मि‍ला, जि‍सने 31 साल की उम्र में से 21 साल हॉस्‍टल में बि‍ताए, छुटपन के 10 साल इस तरह बीते कि‍ वे मेरे जगने से पहले ड्यूटी पर चले जाते और रात में अक्‍सर मेरे सोने के बाद आते। हॉस्‍टल में आकर मि‍लने के लि‍ए भी उनके पास वक्‍त नहीं था, आज वे रि‍टायर हो गए हैं और अब मेरे पास वक्‍त नहीं है कि‍ मैं 1000 कि‍.मी का सफर तयकर उनसे मि‍लने जाऊँ।
अपनी व्‍यस्‍तताओं के बीच यह अहसास ही काफी लग रहा था कि‍ वे जहॉं हैं ठीक हैं, यह भूलकर कि‍ जि‍स घर में बचपन के कुछ पल गुजारे हैं, जि‍स घर के दरों-दीवार पर मेरे पि‍ता के सपने आज भी जिंदा हैं, जहॉं अपने नाती-पोतों की कि‍लकारी सुनने के लि‍ए उनके कान तड़प रहे हैं, आज उसी मकान में कैद वे अपनी ठंडी आहें सुनने के लि‍ए वि‍वश हैं। बुढापा बेबस कर देता है या वक्‍त, ठीक से उन्‍हें भी पता नहीं।
मेरे दोनों छोटे भाई अवि‍वाहि‍त हैं और माता-पि‍ता के साथ रहते हुए अपने काम-धंधे में अच्‍छे रमे हुए हैं। संजय (मझले भाई) का फोन आया कि‍ पापा को हार्ट-अटैक आया है और कुछ भी हो सकता है। मेरे होश उड़ गए। अबतक इस कहावत ने मुझे रोने नहीं दि‍या है कि‍ मर्द को रोना शोभा नहीं देता है, पर सच कहूँ, मैं इसपर कायम न रह सका।

मैं अकेला जाना चाहता था, मगर पत्‍नी ने साथ चलने की जि‍द की। ट्रेन के सफर के दौरान एक अनजाना-सा डर मन में घुसपैठ कर रहा था, अगली सुबह हॉस्‍पि‍टल में यह देखकर चैन की सॉंस ली कि‍ वे गहरी नींद में लेटे हुए हैं और इ.सी.जी के मोनि‍टर पर सबकुछ नॉर्मल दि‍ख रहा है।


उनके सोने तक वि‍जय (छोटा भाई) से बात होती रही। उसने उदास स्‍वर में बताया कि‍ पापा को शायद कुछ अंदेशा था कि‍ ऐसा कुछ हो सकता है इसलि‍ए उन्‍होंने एक दि‍न कहा कि‍ अगर मुझे कुछ हो जाए तो इस-इस कंपनी में बीमा करवाया है, ध्‍यान रखना। यह कहते हुए वि‍जय की ऑंखों में ऑसू छलक आए। कहने लगा- पापा अगर कोई काम न करें और केवल हमारे काम को देखते रहें तो इतने भर से हमें काफी हौंसला मि‍लता है, और हमारे काम में हाथ बँटाते हुए उन्‍हें कुछ हो गया तो ऐसे काम से क्‍या लाभ!
पापा को पीठ दर्द की शि‍कायत थी, मैंने डॉक्‍टर से पूछा कि‍ अटैक से पीठ दर्द का क्‍या ताल्‍लुक है। उसने बताया कि‍ उन्‍हें ठंड लग गई है और यह संयोग ही है कि‍ दोनों चीजें साथ-साथ घटि‍त हुई। पापा की पीठ दबाते हुए महसूस हुआ कि‍ इनकी हड्डि‍यों पर उम्र हावी होने लगी है, त्‍वचा शि‍थि‍ल पड़ने लगी है, नाती-पोतों को खि‍लाते हुए जरा-सी असावधानी बरती तो हड्डि‍यॉं चटक भी सकती हैं।

यह सब देखते-सोचते हुए मन अवसाद से भरा जा रहा था, पि‍ता के साथ बि‍ताए हुए दि‍न क्‍या अवसान के नि‍कट है! समय का रेत क्‍या मुट्ठी से यूँ ही नि‍कल जाएगा और पि‍ता का फर्ज नि‍भाने के क्रम में मैं भी अपने बेटे से इतनी ही दूरी पर खड़ा मि‍लूँगा। आज ही लौटा हूँ, इस उदासी में न जाने कैसे-कैसे वि‍चार मन में आ रहे हैं......
(पापा का पीठ दर्द ठीक हो रहा है और हार्ट के लि‍ए डॉक्‍टर ने कुछ दि‍न बाद एंजि‍योग्राफी कराने का नि‍र्देश दि‍या है।)

(शेष अगली पोस्‍ट में)

50 comments:

Manoshi said...

सब ठीक हो जायेगा चिंता न करें हमारी दुआयें हैं आपके साथ। माता पिता से दूर रहने का ग़म तो हम में से बहुत लोगों को है...पर क्या करें, ज़िंदगी की रवायतें...

ranjan said...

यही व्यथा है.. इस भाग दौड़ ने हमें अपने से दूर कर दिया... पिताजी के शिघ्र स्वास्थ्य की कामना..

ताऊ रामपुरिया said...

आपकी अनुपस्थिति खल ही रही थी और मैं आपके बारे में पिछले ३/४ दिनों से सोच ही रहा था ! फ़िर सोचा की आप काम में व्यस्त होंगे !

अभी आपकी पोस्ट से मालुम हुआ की पापाजी की तबियत ठीक नही है ! आपके मन में जो ऊहापोह है वो एक स्वाभाविक मानवीय संवेदनाए हैं ! कुछ लोग तो इसे भी नही महसूस कर पाते !

अब आपकी उम्र के हिसाब से पापाजी की इतनी भी ज्यादा उम्र नही होगी की आप इस हद तक मायूस हो जाए ?

आप उनकी एंजियोग्राफी करवा कर डाक्टर की राय अनुसार उनका इलाज करवाए ! आप यकीन रखिये वो पहले से भी ज्यादा उर्जावान हो जायेंगे ! अगर सर्जरी की जरुरत नही हो तो दवाए भी बड़ी कारगार हैं !

मैं इस मामले में यकीन से कह सकता हूँ की ह्रदय रोगों में मेडिकल साईंस ने जो आयाम छुए हैं वो हम ह्रदय रोगियों के लिए वरदान हैं ! और भारत में विश्व स्तर की ये सुविधाए नगण्य मूल्य पर आज उपलब्ध हैं !

बस मन में एक सकारत्मक सोच की जरुरत है जो आप परिवार के लोग ही दे सकते हैं

मैं ये सब अनुभव से बोल रहा हूँ !

ईश्वर उनको बहुत लंबा स्वस्थ जीवन दे ! यही शुभकामनाएं हैं !

रामराम !

PD said...

आपकी बात पढ़कर मन भावुक हुआ जा रहा है.. मन में एक भय सा भी हो रहा है.. अगले साल मेरे पापा भी रिटायर होने जा रहे हैं..

आपके पिताजी के लिये शुभकामनाऐं..

Udan Tashtari said...

भाई

एक पुत्र की जायज संवेदनाऐं हैं जो हाबी हो रही हैं. होना भी चाहिये. यही जीवन चक्र है. कल हम सब भी उसी कार्नर पर होंगे.

मगर आप बहुत ज्यादा चिन्ता न करें. चिकित्सा विज्ञान बहुत विकसित है. हार्ट अटैक आदि का इलाज है. एन्जियोग्राफी करवाईये.

पिता जी एकदम स्वस्थ हो जायेंगे, हमारी शुभकामनाऐं हैं आप और आपके परिवार के साथ.

कोशिश किजिये जब कभी मौका मिले. अधिक से अधिक समय उनके साथ गुजारें.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

आपके पिता जी जल्दी से स्वस्थ हो जाएँ यही ईश्वर से दुआ है

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

मैं भी अपने पिता के साथ अधिक नहीं रह सका था और बिना किसी इतिहास के वे एक दिन हृदयाघात से चले गए।
आप पापा को जितना सहेज सकें सहेजें। वे हमारा पूर्व जन्म हैं।

अफ़लातून said...

प्रिय भाई जीतेन्द्रजी,
एन्जियोग्राफी सिर्फ़ जाँच है जिससे हृदय से जुड़ी धमनियों में रुकावट का पता चल जाता है । यदि आवश्यक हुआ तब बाई-पास शल्य क्रिया करवानी पड़ती है। एन्जियोप्लास्टी इससे सरल प्रक्रिया है लेकिन आज कल अधिक खर्चीली और कम टिकाऊ साबित हुई है,नतीजन अमेरिका में बन्द है।
मेरे पिता ८४ वर्ष के हैं और अत्यन्त सक्रिय हैं।उनका बाई पास दस साल पहले हुआ था।मेरा इस साल फरवरी में हुआ तब नई तकनीक के कारण अत्यन्त सस्ता और जल्दी सामान्य होने वाली प्रक्रिया थी।
आपको किसी गैर तकनीकी व्यक्ति से अनुभव पूछना हो ,तो बन्दा हाजिर है। मेरे बड़े भाई भी इस प्रक्रिया से गुजर चुके। आप लोगों से निवेदन है कि किसी भी रूप में तम्बाकू का सेवन न करें। और प्रतिदिन ४० मिनट चलें।

परमजीत बाली said...

आपके पिता शीघ्र स्वास्थ लाभ करें।यही ईश्वर से प्रार्थना है। ईश्वर उनको बहुत लंबा स्वस्थ जीवन दे ! यही शुभकामनाएं हैं ।

सुशील कुमार छौक्कर said...

चिंता मत कीजिए सब जल्दी ही ठीक हो जाऐगा। आपके पिताजी जल्द ही ठीक होकर घर जाएं यही हमारी दुआ है। आपकी भावनाएं मैं समझ सकता हूँ।

प्रहार - महेंद्र मिश्रा said...

चिंता न करें.ठीक हो जायेगा.उनको ईश्वर बहुत लंबा स्वस्थ जीवन दे ..

Gyan Dutt Pandey said...

भैया, अपना सम्बल बनाये रखो। सारी प्रार्थनायें आपके साथ। ईश्वर करें सब ठीक हो।

seema gupta said...

आपके पिता शीघ्र स्वास्थ लाभ करें।यही ईश्वर से प्रार्थना है। चिंता मत कीजिए सब जल्दी ही ठीक हो जाऐगा।

डॉ .अनुराग said...

जी हाँ कई लम्हे हमें अचनाक वक़्त की कमी का ओर किसी इंसान की कीमत का अहसास करा देते है

cmpershad said...

आज की चूहादौड जिंदगी में हर कोई बिखरा हुआ है पर अभी संवेदनाएं मरी नहीं है, यही परिवार को जीवित रखती है

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

आज के युग मे सबसे बेहतर और १०० % इलाज़ है ह्रदय रोगों का . चिंता न करें मेरे कई नजदीकी लोग इस रोग को परास्त कर सामन्य जिन्दगी जी रहे है दसिओं सालो से . ईश्वर व डॉक्टर पर विश्वास रखे सब ठीक होगा

अभिषेक ओझा said...

हिम्मत रखिये भगवान सब कुछ अच्छा करेंगे. आपके पिताजी जल्दी स्वस्थ हों यही कामना हैं.

... घर से दूर रहने का तो कुछ ऐसा ही हाल अपना भी है :(

शोभा said...

इसी को जीवन कहते हैं। आगे बढ़ जाइए। शुभकामनाओं सहित

masijeevi said...

शुभकामनाएं।।

सचमुच ये अहसास बेहद लाचारगी भरा है कि हमें अकेले रहना पड़ सकता है बिन माता पिता के। कल्‍पना मात्र सिहरन पैदा करती है, भले ही दूरी, समय का अभाव या अन्‍य वजहों से लगातार सानिध्‍य लाभ न भी लेते हों।

COMMON MAN said...

इतना ही कहूंगा कि मां-बाप की जगह कोई नहीं ले सकता, प्रार्थना करूगा कि आप के पिताजी जल्दी स्वस्थ हों.

कार्तिकेय said...

काफ़ी दिनों बाद आपको देखकर अच्छा लगा. पिताजी के स्वास्थ्य की मंगलकामनाएं.

panchayatnama said...

अरे बिरादर !! - फि‍तरत ज़माने की , जो ना बदली तो क्या बदला! ज़मीं बदली ज़हॉं बदला,ना हम बदले तो क्या बदला!

बड़ी ही दुरुस्त लाइनें लिखीं हैं आपने.. और बस इसी पे कायम रहने का वक्त है. अगर आपको लगता है, कि आप समय नहीं बिता पा रहे हैं, तो जरूर बदलें अपने आपको और पिताजी के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त गुजारें.. वक्त चला जायेगा तो फिर पछताने से ....

और आप बहुत ही लकी हैं - अभी भी कुछ नहीं बिगडा है.. खूब वक्त गुजारें साथ में.. कितनों के ऊपर से साया बहुत पहले ही उठ जाता है.. माता पिता , भगवान् की देन हैं. उनके साथ समय बिताने से ही उनको बहुत खुशी मिलती है..

भगवान् आपके पिताजी को जल्द स्वस्थ करें और आपको मानसिक शांती प्रदान करें.

वैसे बड़े ही भावुक इंसान हो भाई.. रुला ही दिया तुमने ऐसा लिख के.. वैसे अच्छा हुआ कि आप इसी बहाने मायके हो आए... हर चीज के कुछ अच्छे पहलू भी होते हैं.. और देखिये इतने भाई लोगों ने यहाँ इस ब्लॉग के जरिये आपसे अपनी सहानुभूति दर्ज की..

लिखते रहिये.. सब सही होगा...

यूनुस said...

हम शुभकामनाएं करते हैं कि आपके पिता जल्‍दी ही ठीक हो जायें । साहस रखिए और समझदारी से सही इलाज का रास्‍ता चुनिए । अनुभवी साथियों ने आपको काफी कुछ बता ही दिया है ।

"अर्श" said...

जीतेन्द्र भाई मैं अल्लाह मियां से आपके पिता जी के अच्छे स्वस्थ के लिए दुआ करूँगा के वो जल्द से जल्द ठीक हो जाए और अपनी जिंदगी को भरपूर आपलोगों के साथ जिए .. उनकी लम्बी और सुखद उम्र के लिए हमेशा दुआ करूँगा ....
आमीन ..

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

आपके पिता शीघ्र स्वास्थ लाभ करें।यही ईश्वर से प्रार्थना है। ईश्वर उनको बहुत लंबा स्वस्थ जीवन दे ! यही शुभकामनाएं हैं!!!!!!

अनूप शुक्ल said...

जीतेंद्र भाई, हौसला रखें। मेरी भी मंगलकामनायें आपके साथ हैं!

सतीश पंचम said...

ऐसे पडाव जीवन मे आते रहते हैं। चिता न करें, सब ठीक हो जाएगा।

राज भाटिय़ा said...

भाई होसला रखो, यह हम सब की मजबुरीयां ही है,मै भी २९, ३० साल से घर से दुर हू, आप के पिता जी जल्दी ठीक हो जायेगे, ओर आज कल इलाज भी बहुत अच्छे अच्छे है,
अगर आप के पिता जी की पीठ मे सर्दी से दर्द है तो एक दवा जो मेने यही बांल्ग मै ही कही पढी थी, ओर मेने उसे आजमाया तो मुझे बहुत आराम आया, फ़िर कई जानपहचान वालो ने भी इसे आजमाया, ओर सब को आराम आया,अगर चाहो तो एक बार अजमा कर देख लो....
१०० ग्राम सरसो(अगर नही तो कोई दुसरा लेलो) उस मे एक् छोटी चम्मच अजवायन हाथ से मसल कर डाल दे, ओर दो कली लहसुन की बारीक बारीक पीस कर बारीक बारीक पीस कर डाल दे, फ़िर इसे हल्के हल्के सेक पर इसे सेके, जब यह सुनहरी हो जाये तो इस तेल से दर्द वाली जगह ओर उस के आसपास इस तेल से मालिस करे, बस फ़िर थोडा सेक देवे, लेकिन इस के बाद हवा मै मत जाये, दो तीन घ्ण्टे, पहली बार मै ही आप को आराम महसुस हो जायेगा, यह बिधि मेरी नही मेने यही कही से लि है.
धन्यवाद

Anil Pusadkar said...

भगवान सब ठीक करेंगे। हम सब ईश्वर से प्रार्थना करेंगे पापा ज़ल्द ठीक हो जायें।

नितिन व्यास said...

मेरी मंगलकामनायें आपके साथ है, घर से हजारों मील दूर रहने का ग़म तो मुझे भी है...पर क्या करें,

योगेन्द्र मौदगिल said...

शुभकामनाएं
आप मन से पापा के पास हैं
इस देश में जैसा चलन चल रहा है ना मैं अक्सर देखता हूं कि घर के बीच खड़ी कम्बखत एक दीवार दस हजार किलोमीटर जमा सात समंदर का काम कर देती है नीचे के कमरे में अशक्त पिता और ठीक ऊपर गुलछर्रे उड़ाते सपूत
खैर.....

मैं आपकी संवेदनाऒं को नमन करता हूं
पिताजी को पुनः शुभकामनाएं

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

ईश्वर उनको शीघ्र स्वास्थ्य लाभ कराये! इतनी दूर बैठकर हम सिर्फ़ दुआ कर सकते हैं और वही कर रहे हैं. हाँ, यह जो विचार आपके मन में आ रहे हैं, इनको पकड़ कर रखें, ज़िंदगी हमें एक ही बार मिलती है, उसमें अपनों का साथ जितना अधिक मिल सके उतना ही अच्छा है.

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

जीतेन्द्रजी,
आपकी चिँता समझ रही हूँ आज ही ये पोस्ट देखी -चिँता ना करेँ -
पापा जी के पास रहेँ और ईश्वर से प्रार्थना करीयेगा
हम सभी शामिल हैँ !
सब ठीक हो जाये जल्दी
यही शुभकामना है

Zakir Ali 'Rajneesh' said...

अगली पोस्‍ट का शिददत से इंतजार है।

तरूश्री शर्मा said...

जितेन्द्र जी,
पिताजी के स्वास्थ्य लाभ की शुभकामनाओं के साथ उनका प्यार आपके साथ जिदंगी की राहों पर जितनी ज्यादा दूर तक बना रह सके, यह कामना भी। सच कभी कभी बहुत अखरता है परिवार से दूर रहने का दुख....सच कहें तो सालता है।

रंजना said...

behad samvedansheel bhavuk post.bahut sahi kaha aapne.rotee ki hod aur doud me fanse ham kitna kuch kho dete hain.

Ishwar karen aapke pitaji jald hi swastha ho jayen aur we deerghjeevi hon.

अशोक पाण्डेय said...

इतने लोगों की दुआएं आपके साथ हैं, ईश्‍वर जरूर आपके पिता जी को दीर्घायु बनाएंगे। हम भी अपने माता पिता से बिछुड़ने के बारे में सोचते हैं तो एक अजीब सी सिहरन होने लगती है।

दिगम्बर नासवा said...

आप के पिता का स्वस्थ ठीक होगा, हमारी शुभकामनाऐं हैं आप के साथ

अपना ज्यादा से ज्यादा वक़्त उनके साथ बिताएं, ये उनके स्वस्थ की लिए भी अच्छा होगा

राहुल सि‍द्धार्थ said...

पिताजी जल्द से जल्द स्वस्थ हो जाएगें.हमारी शुभकामनाऍ.

आदर्श राठौर said...

उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए शुभकामनाएं

आदर्श राठौर said...

उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए शुभकामनाएं

Sachin Malhotra said...

main to kahuga ki zindgi mein acha or bura dono hi sabhi ke saath hai.. or agar kisi chinta mein pad bhi jaaye to kuch solve to hota nahi hai.. balki or hi tensions creat hoti hai.. isliye bekaar ki chinta chod kar apni life ko aage badne dijiye..... baaki hoyi hai wohi jo ram rakhi racha...
jo rab ne soch rakha hai wo to koi bhi nahi badal sakta...:)

take care...
meri website par bhi aapka intzaar rahega... jaroor join kijiyega...
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Jimmy said...

aapne aacha post kiyaa read ker ki aacha laga mom dad pas ho to sab kuch aacha lagta hai nahi to kuch be nahi


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Rohit Tripathi said...

bahut marmik.. chinta na kijiye sab acha hoga...

New Post :- एहसास अनजाना सा.....

विवेक सिंह said...

आपके पापा के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूँ .

योगेन्द्र मौदगिल said...

कहां हो भाई...?

मनुज मेहता said...

संवेदनाओ से परिपूर्ण , आपको पढ़ना हमेशा ही एक नया अनुभव होता है.

Harkirat Haqeer said...

आपके पिताजी के लिये शुभकामनाऐं..

हमारी दुआयें आपके साथ हैं....

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

How are you Jitendra? And where are you?

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

शीघ्र स्‍वास्‍थ्‍य लाभ की कामना के साथ