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Tuesday, 14 April 2009

आपने बि‍याह कि‍या है या वि‍वाह !!

बेरोजगारी को आवारगी से जोड़कर देखा जाता है, इसलि‍ए कई मॉं-बाप अपने बच्चे को गॉव के पोखर के पास नीम तले ताश खेलते देख चिंति‍त होते रहते हैं। बूढ़ी काकी लड़के की अम्मा को सजेशन देती है-बेलगाम बैल को खूँटी से बॉधकर रखना है तो उसकी शादी करा दो।
शहर में लोग नोकरी ढूँढने जाते हैं, पर छोकरी ढूँढ लाते हैं। मेरे एक मि‍त्र लंबे समय से किसी नौकरी की तलाश में हैं, उम्र 38 के पार हो चली है, पर उनकी नइय्या मझधार में ही है। स्थायी नौकरी के इंतजार में उनके जीवन का हनीमून उदय होने से पहले ही अस्त हो चला है, जनसंख्या वृद्धि‍ के असहयोग आंदोलन के वे प्रणेता नहीं है, मगर ‘ऑफ दी स्क्रीन’ उनकी भूमि‍का इनसे कम भी नहीं है।
दूसरी तरफ, मेरी एक मि‍त्र है, उनकी नौकरी तब लग गई थी जब हमारे खेलने-खाने के दि‍न थे, यानी बारहवीं पास करते ही वे स्थायी नौकरी संग वि‍दा हो ली थी। अब संकट ये है कि‍ उनके पास नौकरी तो है, मगर नौकर नहीं है, माफ कीजि‍एगा, शौहर नहीं है। वह अक्सर परेशान रहती, मुझसे कहा करती- यार सब-कुछ है, मगर घरवालों को चैन नहीं है, मेरी शादी के लि‍ए एक ढ़ंग का लड़का(?) तक नहीं है। तुम खुशनसीब हो, तुम्हारे पास बीवी है, बच्चा है, मेरे पास क्या है? मैंने कहा- तुम्हारे पास एक स्थायी नौकरी है और सबको पता है कि‍ एक स्थायी नौकरी कि‍सी पति‍ से ज्यादा वफादार साबि‍त होती है।
तो इन्होंने अपनी नौकरी करते हुए मनी नामक ‘हनी’ काफी इकट्ठी कर ली है, पर ‘मून’ से वंचि‍त रह गई हैं। ऐसा नहीं है कि‍ इनकी हनी के पास मधुमक्खि‍यॉं न मंडराती हो, मगर इन्होंने कभी उन्हें पर भी मारने नहीं दि‍या। खैर, हमें भी इंतजार है कि‍ इनकी शादी में दि‍या जानेवाला उपहार कि‍स दि‍न उसके तारनहार तक पहुँचेगा, बेचारे पॉंच-छ: साल से यूँ ही पैक्ड पड़े हैं।
तो मैं अपने उस अवि‍वाहि‍त मि‍त्र से बेरोजगारी पर जि‍क्र कर रहा था कि‍ जैसा हाल चल रहा है, उसमें इंतजार की कोई सीमा नहीं है, मगर उम्र की एक सीमा है, शादी-वादी करके नि‍पट लो, नौकरी देर की गाड़ी पर सवार होकर तुम तक पहुँच ही जाएगी।
मेरे मि‍त्र ने कहा- हमारे यहॉं एक कहावत है- नौकरी से पहले की गई शादी को ‘बि‍याह’ कहते हैं यानी ‘आह’ ! और नौकरी के बाद की गई शादी को ‘वि‍वाह’ कहते हैं यानी ‘वाह’ ! अब तुम ही बताओ मि‍त्र, ‘आह’ में दि‍न गुजारे या ‘वाह’ में।
मैंने कहा- गमले में अकेले पनपने की कोशि‍श कर रहे हो, कुम्हला जाओगे, बगीचे में शामि‍ल हो जाओ तो शायद लह (पनप) जाओगे। आवेदन पर 'मैरि‍ड' लि‍खो या 'सिंगल'- वह तो तकदीर और सि‍फारि‍श से ही मि‍लेगी।
खैर इस उमर में समझना-समझाना सब बेकार होता है। मसला ही ऐसा है। आज न जाने कि‍तने युवक-युवती नौकरी की तलाश और इंतजार में जी रहे हैं और उम्र के चौथे दशक में अकेले चले जा रहे है। मुझे तो डर है कि‍ हम भवि‍ष्य की ऐसी पीढ़ी का नि‍र्माण करने जा रहे हैं, जहॉं बाप एक तरफ अपना 70 वॉं जन्म -दि‍न मना रहा होगा दूसरी तरफ उसके बेटे या बेटी की शादी की बात चल रही होगी। ऐसे ‘वि‍वाह’ से तो ‘बि‍याह’ ही अच्छा !!

(चि‍त्र गूगल दादा से उधारी)

30 comments:

मोहन वशिष्‍ठ said...

वाह जी वाह जितेन्‍द्र भाई कई बातें तो बहुत ही काम की बताई हैं आपने पोस्‍ट को पढने में मजा आ गया

ताऊ रामपुरिया said...

वाकई बहुत सटीक बात है. और इस हालात मे बियाह ही ज्यादा अच्छा है.

रामराम.

अनिल कान्त : said...

मज़ा आ गया भाई ...आपकी पोस्ट पढ़कर ...आपने बिलकुल सही लिखा है ...हालात तो ऐसे ही हैं :) :)

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

कुश said...

गंभीर बात बढ़िया अंदाज़ में कही गयी.. आपकी यही स्टाइल तो बहुत भाती है.. आप रेगुलर है मुझे ख़ुशी हो रही है

रंजना [रंजू भाटिया] said...

यह आज की पीढी का वाकई गंभीर मसला है ...जिसे आपने बेहद रोचक अंदाज़ में लिख दिया है .यह बहुत ही अच्छी बात कही आपने ..इसको नोट कर लेना चाहिए
गमले में अकेले पनपने की कोशि‍श कर रहे हो, कुम्हला जाओगे, बगीचे में शामि‍ल हो जाओ तो शायद लह (पनप) जाओगे। आवेदन पर 'मैरि‍ड' लि‍खो या 'सिंगल'- वह तो तकदीर और सि‍फारि‍श से ही मि‍लेगी।

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

बीच का मामला है - वियाह! या बिवाह।

डॉ .अनुराग said...

आपके दोस्त बिलकुल बजा फरमाते है जी......हमारे यहाँ यू पि में बहुतेरे इस ब्याह के चक्कर में बरबाद हुए है .....

"अर्श" said...

waakaee sahi likhaa hai aapne bahot mazaa aaya padhke......



arsh

शोभना चौरे said...

apne bhut achhe se sabki man ki bat kh di

विनीत कुमार said...

और जो भाई विवाह करे और बाद में बियाह साबित हो जाए तो उसका भी कोई तोड़ है, बताइएगा,प्लीज...

संगीता पुरी said...

वाह !! विवाह और ब्‍याह में अंतर हमें पता न था।

अभिषेक ओझा said...

मतलब जल्दी नौकरी मिल जाए और नौकरी मिलते ही शादी कर लेना बेस्ट आप्शन है !

Mired Mirage said...

बियाह हो या विवाह आह के बिना दोनों ही नहीं होते। आह के बिन दोनों ही विव या बिय भर रह जाते हैं। सो आह आह करते हुए जिसका अवसर मिले वही निपटा दिया जाना चहिए।
घुघूती बासूती

seema gupta said...

वियाह! या बिवाह।
"हा हा हा हा हा मजेदार लेख "

Regards

हर्षवर्धन said...

मेरा तो बियाह टलते-टलते विवाह हुआ लेकिन, आपके आखिरी पैराग्राफ में जो चिंता है वो ये सबक देती है कि विवाह जल्द हो तो ठीक नहीं तो, बियाह ही ठीक।

महामंत्री - तस्लीम said...

ये तो बडी मजेदार बात बताई आपने।
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तस्‍लीम
साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन

बोधिसत्व said...

कभी-कभी तो ऐसा भी होता है कि यदि वर जी स्थाई नौकरी में हैं तब कन्या उनकी आधी उमर की होती है। तब एक का तो बिआह होता है दूसरी का तबाह होता है।

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

शादी बियाह के मामले में आपकी बात सौ फीसदी खरी है..

दिगम्बर नासवा said...

सत्य बात...............आज के इस दौर में जो न हो कम है.
सटीक लिखा है,

Anil Pusadkar said...

अपुन तो ना आह वाले हैं ना वाह वाले हैं।

Babli said...

आप का ब्लोग मुझे बहुत अच्छा लगा और आपने बहुत ही सुन्दर लिखा है ! मेरे ब्लोग मे आपका स्वागत है !

मुसाफिर जाट said...

भगत जी, बड़े ही रोचक ढंग से कह डाला है कि आज शादी और रिश्तों से बड़ी चीज है स्थाई नौकरी. हमें स्थाई नौकरी तो मिल गयी है, बस अब तो....

लवली कुमारी / Lovely kumari said...

आपका अंदाज ही जुदा है ...अब नियमित ही रहा करें

मुन्ना के पांडेय(कुणाल) said...

बियाह हो या विवाह ..ये तो ऐसा लड्डू है जो खाए वो पछताए जो ना खाए वो भी

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

पहली बार बियाह और विवाह में अन्तर पता चला.

Science Bloggers Association said...

सही बात, विवाह से बियाह ही अच्छा।
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जादू की छड़ी चाहिए?
नाज्का रेखाएँ कौन सी बला हैं?

Harkirat Haqeer said...

विवाह और बियाह की अच्छी विवेचना की आपने.....मजेदार...!!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

सही बात कही, असली विवाह तो बियाह ही है।

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खुशियों का विज्ञान-3
ऊँट का क्‍लोन

Babli said...

बहुत बढ़िया!

Shibom said...

BIYAH & VIVAH ka maulik difference aaj hi pata chala.. samaj ki vyatha itni safgoi se keh dena or itne rochak andaz mein ki hanste hanste sochna parta hei... aap aisa hi likte rahein or pathakon ka manoranjan karte rahein... per janab har jagan Naukri sifarish se nahi milti hei..