Related Posts with Thumbnails

Tuesday, 15 June 2010

बद्रीनाथ: एक रोमांचक सफर (भाग 3)

जोशीमठ में बुधवार की रात सि‍र्फ चार घंटे सोने के बाद भी तरोताजा महसूस कर रहा था, हालॉंकि‍ दो दिन के भीतर दि‍ल्‍ली से करीब 500 कि.मी. कार चला चुका था, जि‍समें से 300 कि.मी. का पहाड़ी रास्‍ता भी शामि‍ल था। सुबह करीब 6 बजे तीनों गाड़ि‍यॉं बद्रीनाथ के लि‍ए निकल पड़ी। आरंभ का 10 कि.मी. सिंगल लेन सड़क थी और बद्रीनाथ से पहले करीब 15 कि.मी. की सड़क पथरीली थी।


वहॉं टायरों की कचूमर-सी निकल गई। मगर इन दोनों के बीच करीब 20 कि.मी. की सड़क बेहतरीन और चौड़ी थी, जि‍सपर कि‍सी नौसीखि‍ए ड्राइवर को भी कार चलाने का जी मचल जाए!


पाण्‍डुकेश्‍वर और हनुमानचट्टी से गुजरते हुए हम करीब 9 बजे बद्रीनाथ पहुँच गए। पाण्‍डुकेश्‍वर से पहले गोविंदघाट से हेमकुण्‍ड साहिब के लि‍ए रास्‍ता जाता है जो पंजाबि‍यों का तीर्थस्‍थल है। कहते हैं यहीं पर गुरू गोविंद सिंह ने साधना की थी। यहीं कहीं आसपास से फूलों की घाटी के लि‍ए भी रास्‍ता जाता है।

छठी क्‍लास में भूगोल पढ़ाते हुए अकरम सर ने भारत के नक्‍शे में जब इस जगह को मार्क करने के लि‍ए कहा था तब मैंने मजाक में भारत के नक्‍शे में कई फूल बना दि‍ए थे। तब मार भी खाई थी। पता नहीं ये शिक्षक बच्‍चों को इतना पीटते क्‍यों थे- ये सब सोचते हुए ओठों पर अनायास ही मुस्‍कान फैल गई! सोनि‍या और मेरा बेटा इशान गहरी नींद में सो रहे थे। उनकी नींद सीधे बद्रीनाथ जाकर ही खुली।


परेशानी ये थी कि‍ सुबह से चाय-बि‍स्‍कुट के अलावा कुछ भी खाने को नहीं मि‍ला था और अब बद्रीनाथ में सोनि‍या ने अनुरोध कि‍‍या कि‍ नारायण-दर्शन के बाद ही कुछ खाना! अपनी मंजि‍ल पर पहुँचकर मुझे अचानक तेज भूख लग आई थी- मन में यही गूँज रहा था- भूखे भजन न होय गोपाला!!
अब दर्शन से पहले नहाने की भी एक अनि‍वार्यता थी। पता चला कि‍ मंदि‍र के ठीक साथ एक गर्म कुण्‍ड है। हालॉंकि‍ नीचे अलकनंदा की तेज धार बह रही थी पर इसी वजह से उसके घाट पर कोई स्‍नान करता नजर नहीं आया!

तप्‍त कुण्‍ड का पानी इतना गर्म था कि‍ जैसे गर्म खौलते पानी में पॉव डाल दि‍या हो। पर वहॉं कई लोग नहॉं रहा थे। स्‍त्रि‍यों की सुवि‍धा के लि‍ए एक कुण्‍ड को चहारदीवारी से घेर दि‍या गया था। इशान हरिद्वार में ठंडे पानी की वजह से रोने लगा था, यहॉं गरम पानी की वजह से!

(शैलेंद्र जी तप्‍त कुण्‍ड के 55 डी्ग्री. तापमान को झेलते हुए:)

पानी देखने में उतना साफ नहीं था,फि‍र भी भगवान के नाम पर नहा आया। जैसा कि‍ आपको पता ही होगा, धरती के नीचे जलता लावा है। वे ऊपर की चट्टानों को गर्म कर देती हैं इसलि‍ए वहॉं का पानी गर्म होता है, संभवत:सल्‍फर की मौजूदगी से भी ऐसा होता है। जब मैं कुल्‍लू-मनाली गया था, तब वहॉं भी एक ऐसी जगह थी-मणि‍करण। हालॉकि‍ सि‍क्‍कि‍म, उड़ि‍सा आदि‍ जगहों के अलावा दुनि‍या भर में ऐसे कर्इ गर्म सोते मि‍ल जाते हैं।


नहाने के बाद पता चला कि‍ दर्शन के लि‍ए लंबी कतार में खड़ा होना पड़ेगा! भूख से मेरे पॉंव कॉंपने लगे थे। करीब 12 बज चुके थे। एक समझदारी हमने ये दि‍खाई थी कि‍ हमने नीति‍न को पहले ही कतार में खड़ा कर दिया था। जब तक सभी नहाकर आए, दर्शन करने का नंबर आ गया था!

इस बीच शैलेंद्र जी की पत्‍नी की तबीयत बिगड़ने लगी थी। 3133 मीटर (10248फीट) पर उन्‍हें आक्‍सीजन की कमी से लगातार उल्‍टि‍यॉ आ रही थी, डायरीया का शक था! दर्शन के ठीक बाद शैलेंद्र जी पास के एक डि‍सपेंसरी में ले जाकर उन्‍हें ग्‍लूकोज चढवाने लगे।
दर्शन होने के बाद हमने सबसे पहले प्रसाद से गुजारा कि‍या, फि‍र करीब तीन बजे एक रेस्‍टोरेंट में मारवाड़ी और पंजाबी थाली का आर्डर दि‍या। सबसे अच्‍छी बात ये रही कि‍ वहॉं तवे की रोटी मि‍ल गई। उधर भाभी जी की तबीयत में कुछ सुधार आ रहा था। शाम करीब पॉंच बजे के बाद बद्रीनाथ से जोशीमठ की तरफ जानेवाला रास्‍ता बंद कर दि‍या जाता है-यह सोचकर भी भाभी जी ने तबीयत ठीक बताई होगी!
खैर, जैसे-तैसे हम सभी साढ़े चार बजे तब लौटनेवाली गाड़ि‍यों की कतार में खड़े हो गए। मैं हमेशा अपसेट होता हूँ जब इतनी दूर आउँ और जल्‍दी-जल्‍दी के चक्‍कर में कुछ चीजें देखने से रह जाऊँ- जैसे वसुधारा नामक झरना नहीं देख पाया, माना गॉंव यहॉं से मात्र 5 कि.मी. दूर था, जो भारतीय सीमा का आखि‍री गॉंव था, वहॉं भी नहीं जा सका, न फूलों की घाटी देख सका, न ही हेमकुण्‍ड देख पाया! सबसे ज्‍यादा अफसोस इस बात की थी कि‍ इतनी दूर आया पर बर्फ से ढँके पहाड़ो पर चलने का सुख नहीं ले पाया क्‍योंकि‍ वे अभी भी हमसे कई कि.मी.दूर थे! हॉंलॉंकि‍ वे सामने ही नजर आ रहे थे। नीलकंठ पर्वत का मनोरम दृश्‍य अलौकि‍क प्रतीत हो रहा था!


अब हमें दि‍ल्‍ली के लि‍ए लौटना था और शाम के 5 बज रहे थे। जाहि‍र है हमें 45 कि.मी. दूर जोशीमठ में रात को रूकना ही पड़ता। मेरे दि‍ल में एक हि‍ल-स्‍टेशन जाने का क्रायक्रम बन चुका था, पर सभी लोग इतने थके हुए थे कि‍ ये बात अभी कहने का खतरा मैं नहीं लेना चाहता था! मैं कार चलाते हुए सोचता जा रहा था कि‍ औली से बर्फीले पर्वत कि‍तने पास नजर आते होंगे!
क्रमश:

अन्‍य कड़ि‍यॉं-
बद्रीनाथ- औली से वापसी(अंति‍म कड़ी)
पर्वतों से आज में टकरा गया (भाग 4)
बद्रीनाथ: एक रोमांचक सफर (भाग 2)
बद्रीनाथ: एक रोमांचक सफर (भाग 1)

13 comments:

रंजन said...

beautiful!!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बहुत सुन्दर जगह है..

Udan Tashtari said...

आनन्द आ गया वृतांत पढ़कर और तस्वीरें देखकर.

नीरज जाट जी said...

भगत जी,
मैं आपकी परेशानी समझ सकता हूं। लेकिन आप मायूस ना हों। इधर घुमक्कडी शास्त्र लिखा जा रहा है। आप चाहें तो घर बैठे ही आनन्द ले सकते हैं।

राम त्यागी said...

one word ..awesome !!

नीरज गोस्वामी said...

आपके साथ लगातार बदरीनाथ यात्रा का आनंद उठा रहा हूँ...मुझे अपनी यात्रा का संस्मरण हो आया...जो लगभग बीस बैस वर्ष पहले की गयी थी लेकिन फोटो देख कर लग रहा है जैसे कुछ भी नहीं बदला है...समय थम सा गया है...सड़कें अलबत्ता ज्यादा चौड़ी हो गयीं हैं...हो सकता है रहने खाने की सुविधा भी बढ़ गयी हो...बद्रिरात में रात रुकें और फिर सुबह की पहली किरण से स्वर्ण बने नीलकंठ को निहारें...अहहाहाहा...ऐसा अलौकिक दृश्य देख जीवन धन्य हो जाता है... मेरी दादी जब बदरीनाथ यात्रा को गयीं थीं तब गोविन्द घाट से पैदल ही जाना पड़ता था...ये मैं छटे दशक की बात कर रहा हूँ...
नीरज

P.N. Subramanian said...

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति. चित्र भी सजीव लगे.

पी.सी.गोदियाल said...

Really !

प्रवीण पाण्डेय said...

सुन्दर वृत्तान्त व चित्र ।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

बद्रीनाथ के रोमांचक सफर की जानकारी का आभार!

Mrs. Asha Joglekar said...

बहुत सुंदर तस्वीरें और वर्णन भी । मायूस ना होना आगे मौके और मिलेंगे ।

Rahul Singh said...

सुंदर शहर की रोचक दास्‍तान.

मुन्ना के पांडेय(कुणाल) said...

sir,
kamaal ka likha hai aapne...ultimate))))
VASUDHARA se aage satopanth ka trekk kijiye majedaar hai...par haan pariuvaar na ho to adhik behtar rahega...valley of flower mein to sab kuchh hi mystic hai.is vajah se bhi adbhut mana mein bhotia chai jarur pijiye kabhi kamar aur jodo ke akdan ko chhu mantar kar degi...main udhar 2007-08 mein gaya tha.fir auli se do din ka trekk mara kuvaari pass ka 360 degree se himalay bko dekhna .kaisa hota hai imagine kijiye....auli se 2 din ka trekk hai