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Tuesday, 24 May 2011

पापा! मैं बड़ा हो रहा हूँ!

अपने बेटे की अनकही बातें कभी-कभी ही सुनाई देती है। आज फुर्सत नि‍काली है उसकी बात सुन सकूँ।
अभी 4 साल ही तो पूरे कि‍ए है उसने।
यह भी संभव है कि‍ मेरे बेटे में आपके अपने बेटे का बचपन नजर आ जाए।
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पापा!
इन दि‍नों मैं मस्‍त रहता हूँ!
क्‍या करूँ
उमर ही ऐसी है!
मैं मोबाइल गि‍रा देता हूँ
आप नाराज होते हो!
मैं मार्केट में जि‍द करता हूँ
आप परेशान होते हो!
मैं पानी बर्बाद करता हूँ
आप एंग्री करते हो!

खाने-पीने के नखरे से
आप तंग आ चुके हो!

मैं कुछ कहना चाहता हूँ
आप इसे बकबक कहते हो!
आपके कहने पर
मैं कापी कलम लेकर बैठता हूँ
पर मैं उसपर आड़ी ति‍रछी लाइने खिंचना चाहता हूँ
आप उसपर कुछ रूल समझाते हो,
पता नहीं क्‍यों
वर्टीकल लाइन हॉरीजेंटल लाइन कहते हुए
जेंटल नहीं लगते हो!

पापा आप मुझे बहुत अच्‍छे लगते हो
मम्‍मा की तरह!
कहने को छुट्टी है स्‍कूल की
पर मैं तो अभी बच्‍चा ही हूँ!
मुझे समय से बंधना अच्‍छा नहीं लगता
सच बताना
समय पर कि‍सका बंधन रहा है!
आप बीजी हो
मम्‍मा भी बीजी है
मेरा न कोई दोस्‍त!
न कोई भाई न बहन!
जो हो आप हो
आप ही हो!



मैं कि‍सके साथ खेलूँ!
कि‍ससे बोलूँ!
बाद में कहीं मैं
बीजी हो जाउँ
आपकी ही तरह.....
तो मत कहना कि‍
भटक गया हूँ.....
मैं आप दोनों को बहुत मि‍स करता हूँ!
जानता हूँ
आप दोनों भी मि‍स करते हैं!
मगर....



फि‍र भी मेरी शरारत पर
नाराज न होना!
मैं भी तो माफ करता हूँ
आप दोनों को,
जो मुझपर पैसे तो खर्च करते हो
पर समय नहीं ...........

(बेटे ईशान के लि‍ए)
जि‍तेन्‍द्र

8 comments:

रश्मि प्रभा... said...

फि‍र भी मेरी शरारत पर
नाराज न होना!
मैं भी तो माफ करता हूँ
आप दोनों को,
जो मुझपर पैसे तो खर्च करते हो
पर समय नहीं ...........
amazing ... aapki rachna vatvriksh ke liye chahiye rasprabha@gmail.com per bhej dijiye parichay tasweer blog link ke saath

सदा said...

समय पर कि‍सका बंधन रहा है!
आप बीजी हो
मम्‍मा भी बीजी है
मेरा न कोई दोस्‍त!
न कोई भाई न बहन!
जो हो आप हो
आप ही हो!

वाह ... बहुत ही अच्‍छा लिखा है ।

शिवकुमार ( शिवा) said...

इसी लिए तो बचपन को हम उम्र भर नहीं भूलते .. बहुत सुंदर रचना . कभी समय मिले तो हमारे shiva12877.blogspot.com ब्लॉग पर भी अपने एक नज़र डालें .

निवेदिता said...

बहुत अच्छा और सच्चा लिखा है ...........
प्यारे ईशान को शुभकामनायें !!

Udan Tashtari said...

बहुत सुन्दर!!! प्यारा बच्चा है ईशान!!

प्रवीण पाण्डेय said...

वाह, चित्र देखकर व कविता पढ़कर आनन्द आ गया।

Gyandutt Pandey said...

इस सुन्दर बच्चे पर समय न दे पाना तो बहुत ही गलत है!
(खैर, नसीहत दे रहा हूं, पर कहीं खुद में अपराध बोध भी है।)

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

गज़ब की रचना। पितृहृदय की ममता, वाह! बहुत सुन्दर!