
दो-तीन हफ्ते बाद भी उसकी परेशानी ज्यों-कि-त्यों बनी रही, जबकि पंडित ने कहा था कि इसका फल तत्काल मिलेगा। इसके बावजूद वह श्रद्धापूर्वक वहॉं जाता रहा और दाल खिलाता रहा।
आठवें मंगलवार को जब वह दाल खिलाने पहुँचा़ तो देखा कि ऊँटवाले का लड़का तैयार होकर कहीं जा रहा था। उसने ऊँटवाले से यूँ ही पूछ लिया कि आपका लड़का कहीं काम पर जा रहा है क्या ?
ऊँटवाले ने कहा- अरे नही, वह कोर्ट जा रहा है, लड़कीवाले दो साल से परेशान कर रहे हैं, उन्होंने केस कर रखा है, नौ लाख रूपये की मॉंग कर रहे हैं, कहते हैं कि दहेज वापस करो। अब आप ही बताओ, शादी के दो साल बाद दहेज का द भी नहीं दिखता है, नौ लाख कहॉं से दें। अब तो रब ही मालिक...
वह दुखी होकर लौट रहा था, उसका मन खिन्न था। उसे पशु को खिलाने का अफसोस नहीं था, न ही सोलह किलो दाल की चिंता। उसके संकट में खास फर्क भी नहीं आया था। इसके बाद उसने वहॉं जाना छोड़ दिया। उसके दोस्तो ने उसे ढ़ॉंढ़स बढ़ाया कि चलो अच्छा किया जाना बंदकर दिया, जिस आदमी के पास दो-दो ऊँट है, वह इतनी मुसीबत में है तो उससे तुम्हांरी समस्या कैसे दूर होगी!
उसने कहा- क्या बेकार की बात करते हो, मैंने वहॉं जाना इसलिए बंद कर दिया है क्योंकि दो किलो दाल खाने में ऊँटों को एकाध घंटे से ज्यादा लग जाता है। मैं वहॉं दस-पंद्रह मिनट से ज्यादा रूक नहीं सकता, और मुझे संदेह है कि मेरे निकलते ही मेरा चारा वो अपने घोड़े को खिला देते होंगे।
दोस्त ने पूछा- तो अब क्या सोचा है ?
उसने कहा- अब ऐसा मालिक ढ़ूँढ़ रहा हूँ जिसके पास सिर्फ ऊँट हो, घोड़े नहीं !
(चित्र गूगल के सौजन्य से। इसकी खास बात यह है कि इसे पिकासो ने बनाया है)