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Thursday, 3 November 2011

रि‍मोट कंट्रोल

(1)

-बेटा
-.............
-तुम पॉंच साल के होने वाले हो
-पॉंच यानी फाइव इयर, मेरा बर्ड-डे कब आ रहा है पापा। बताओ ना!
- बस आने ही वाला है। पर ये बताओ तुम मम्‍मा, नानू,नानी मॉं और दूसरे लोगों से बात करते हुए 'अबे' बोलने लगे हो।
बड़े लोगों को 'अबे' नहीं बोलते
, ठीक है!
-तो छोटे बच्‍चे को तो बोल सकते हैं!
-हॉं... नहीं कि‍सी को नहीं बोलना चाहि‍ए।
अच्‍छी बात नहीं है।
-मोहि‍त और आदि‍ को तो बोल सकता हूँ, वो तो मेरे साथ ही पढ़ता है।
- मैंने कहा ना- 'अबे' कि‍सी को नहीं बोलना,ठीक है
- ठीक है 'अबे' नहीं बोलूँगा।
- याद रखना
, तुम्‍हे दुबारा कहना ना पड़े।
- 'अबे' बोला ना, नहीं बोलूँगा!!

(2)
- बेटा!
- हॉं पापा!
- तुम बदमाश होते जा रहे हो। तुमने मोहि‍त को मारा।
-
नहीं पापा, पहले उसने ही मारा था। मैंने उसे कहा कि‍ मुझसे दूर बैठो मगर वह मेरे पास आकर मेरी कॉपी............
- चुप रहो, मुझे तुम्‍हारी टीचर ने सब बता दि‍या है, तुमने उसकी कॉपी फाड़ी और उसे मारा भी
अब माफी के लि‍ए गि‍ड़गि‍ड़ाओ वर्ना इस बार न बर्ड डे मनेगा ना गि‍फ्ट मि‍लेगा!
- ठीक है- गि‍ड़-गि‍ड़- गि‍ड़-गि‍ड़- गि‍ड़-गि‍ड़-................

(3)
- पापा, ये रि‍मोट वाली कार दि‍ला दो ना!
- नहीं, अभी चार दि‍न पहले ही तो मौसा ने गि‍फ्ट कि‍या था।
- पर वो तो खराब हो गई!
- उससे पहले संजय चाचू और मामू भी ने भी तो रि‍मोट वाली कार दि‍लवाई थी बेटा!
- पर आपने तो नहीं दि‍लवाई ना, प्‍लीज पापा, दि‍ला दो ना- दि‍ला दो ना!
मैं फि‍र दुबारा नहीं मॉंगूँगा, प्‍लीज-प्‍लीज!

- ठीक है, पर ध्‍यान रखना, दुबारा नहीं मॉंगना,और कार टूटनी नहीं चाहि‍ए। ये लो!
-ठीक है
!
- अरे मोहि‍त, तू कहॉं जा रहा है ? पापा ये मोहि‍त है, मेरे स्‍कूल में पढता है।
पापा मैं इसके साथ खेलने जा रहा हूँ, बाय
!
- अरे कार तो लेता जा.....रि‍मोट वाली.......!!??
- आप इसे घर ले जाओ, ठीक से रख देना मैं आकर इससे खेलूँगा!

मैं मार्केट से घर जाते हुए सोचता रहा कि‍ बचपन में मेरे पि‍ता जी का मुझपर कि‍तना कंट्रोल रहा होगा........

5 comments:

नीरज जाट said...

अच्छा जी, बेटा पांच साल का होने वाला है। शुभकामनायें।

प्रवीण पाण्डेय said...

बच्चे आपको बुद्धि से पटखनी देने में सक्षम हैं।

फकीरा said...

आज कल बच्चे बहुत शैतान हो गए है
हमारी कल्पनायो से कहीं आगे

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

अच्छा है जी, बचपन को तो बस निहारते रहिए...।

आपकी आवृत्ति कम हो गयी है। कुछ मेरी ही तरह...

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

आगे-आगे देखिए होता है क्या?